India- International Relations

भारत ने किया Taiwan का समर्थन , China को दिया कड़ा संदेश …

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भाजपा के दो सांसद – मीनाक्षी लेखी और राहुल कस्वां – ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और यहां तक कि उनके बधाई संदेश भी भेजे। आपकी जानकारी के लिए बता दे की चीन हमेशा से Taiwan को अपना छेत्र मानता है। त्साई को बुधवार को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ दिलाई गई जिसमे मीनाक्षी लेखी और राहुल कासवान 41 देशों के 92 गणमान्य अतिथियों में शामिल थे, जिनकी समारोह में ऑनलाइन उपस्थिति थी क्योंकि ताइवान में कोविद -19 महामारी को देखते हुए विदेशी लोगों पर प्रतिबंध जारी है।

2016 में, जब त्साई अपने पहले कार्यकाल के लिए चुने गए थे। उस समय मोदी सरकार ने उद्घाटन समारोह के लिए अपने सांसदों को ताइवान भेजने के खिलाफ फैसला किया था लेकिन इस बार, भारत-ताइपे एसोसिएशन के कार्यवाहक महानिदेशक, सोहांग सेन ने भाजपा सांसदों को भी शामिल किया, जिन्होंने ताइपे में समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत का Taiawn से कोई राजनयिक सम्ब्न्ध नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की भारत की ही तरह UN के 194 देशों में से 179 देशों का भी कोई संबन्ध नहीं है।

चीनी अधिकारियों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अपना रोष व्यक्त किया क्योंकि चीन शुरू से ही Taiwan को अपना छेत्र मानता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बीजिंग में संवाददाताओं से कहा, “हम आशा करते हैं और विश्वास करते हैं कि ये देश ताइवान की  स्वतंत्रता के लिए अलगाववादी गतिविधियों का विरोध करेंगे  और इस फैसले का विरोध करने के लिए  चीनी लोगों के उचित कारण को समझेंगे और उसका समर्थन करेंगे।”

1949 में ताइवान का गठन किया गया था, कुओमितांग (चीनी राष्ट्रवादी पार्टी) के नेतृत्व के बाद क्रांतिकारी गृह युद्ध के बाद मुख्यभूमि चीन भाग गया, और एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। तब से, ताइवान ने एकीकरण के लिए चीनी नेतृत्व का विरोध किया है, और स्व-शासन की अपनी स्थिति को बनाए रखा है। “ONE CHINA ” नीति का पालन करने वाले अधिकांश देशों ने ताइपे के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं, हालांकि जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे अधिकांश देश है जिन्होंने ताइवान के साथ मजबूत व्यापार, सांस्कृतिक और यहां तक कि सुरक्षा संबंधों को बनाए रखा है।

हालांकि भारत का ताइपे में आधिकारिक मिशन नहीं है लेकिन पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच संबंध लगातार बढ़े हैं। भारत में प्रतिनिधि कार्यालय, भारत-ताइपे एसोसिएशन के माध्यम से ताइवान में राजनयिक उपस्थिति है। बदले में, ताइवान के विदेश व्यापार विकास परिषद ने 2018 में भारत में चार नए कार्यालय – दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में स्थापित किए थे।

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