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7 सितंबर की रात को क्या हुआ था? जो सुर्ख़ियों में है, असली कहानी अब सामने आ गयी है

भारत फ्रंटफुट पर खेल रहा है।

भारत और तिब्बत बॉर्डर पर चीन की गुंडागर्दी उसी पर भारी पड़ती जा रही है। LAC पर अपना वर्चस्व जमाने की नई जुगत में चीन ने कुछ टाइम पहले ही भारतीय सैनिकों को डराने के लिए और अपना प्रभाव जमाने के लिए कुछ हवाई राउंड फायर भी किए है लेकिन भारतीय सेना अपनी जगह से हिली भी नहीं जिससे अब चीन की सेना बौखला सी गई है।

शंघाई Co-operation Organisation के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के बीच में 10 सितंबर को एक जरूरी बैठक भी होगी है और यहां पर S.Jayshankar अपने चीनी समकालीन वांग यी के साथ बैठक करेंगे वो इसीलिए चीन LAC पर हमला करके भारत पर इस बैठक से पहले दबाव बनाना चाहता था लेकिन इसके उन्होंने उल्टा LAC पर ही मात खाने पर अपनी कुंठा जगजाहिर भी कर दी थी।

इस टाइम LAC पर भारत एक लाभ वाली स्थिति में है और भारतीय सैनिकों ने अभी कुछ टाइम पहले ही रेजांग ला के पास रेकिन ला को चीन के कब्जे से मुक्त भी करा दिया है। चीन इन सारी गतिविधियों से काफी ज्यादा डर गया है।

जो अब उसके कूटनीतिक रुख में साफ दिखाई दे रहा है। SCO के रक्षा मंत्री सम्मेलन में भी ये चीन के रक्षा मंत्री ही थे। जो तब भारत के रक्षा मंत्री से मुलाक़ात करना चाहते थे। इससे साफ़ पता लग रहा है कि इस टाइम भारत फ्रंटफुट पर खेल रहा है।

अब चीन के विशेषज्ञ अपने आप को बैकफुट पर नहीं देखना चाहते। इसलिए चीन की आर्मी के सैनिकों ने 7 सितंबर को LAC पर हमला करने की कोशिश की है। ताकि 10 सितंबर को जब वो लोग बैठक करें तो दबाव भारत के ऊपर आये। उनके ऊपर ना आये।

लेकिन इसका उल्टा हुआ, क्योंकि भारतीय आर्मी ने साफ़ कर दिया है, कि PLA सैनिकों ने हवा में कुछ राउंड भी फायर किए थे और ये सब हमारे सैनिकों ने नहीं किया था।

इससे साफ होता है कि चीन और पाकिस्तान में कोई अंतर नहीं है और ये सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि चीनी रणनीतिज्ञों ने एक बार फिर भारतीय सैनिकों की क्षमता को कम समझा है।

भारतीय सेना ने बहुत टाइम पहले बोल दिया है, कि वो शांति की पक्षधर है। लेकिन वो राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए हर टाइम प्रतिबद्ध है।

हमले के बाद की चीनी प्रतिक्रिया को देखते हुए यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि चीन इस समय अपने इरादों में असफल रहा है, जिसकी कुंठा उससे छुपाए नहीं छुपती।

चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत ने एक बार फिर उनकी सीमा में घुसने की हिमाकत की है और चीनी सेना को उचित एक्शन लेने के लिए बाध्य होना पड़ा।

लेकिन भारत की तरफ से चीन के प्रोपगैंडा को हवा करने में पल भर का भी टाइम नहीं लगा। इसलिए चीन ने अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया प्रोपेगैंडा।

ग्लोबल टाइम्स के एक संपादकीय में स्पष्ट लिखा गया है, ‘कि हम भारत को चेतावनी देते हैं। तुमने सीमा लांघी है और तुम्हारे सैनिकों ने भी।

तुम्हारे राष्ट्रवादी पब्लिक ओपिनियन ने भी सारी सीमाएं लांघ दी है। चीन के खिलाफ तुम्हारी नीति ने सीमा लांघी है। तुम अति आत्मविश्वास में PLA और चीन के लोगों को ओर ज्यादा उकसा रहे हो और ये खाई के छोर पर हाथ के बल खड़े होने जैसा है।’

चीन कहानिया बना रही है क्योकि उनको शौक है। इसमें कोई शक तो नहीं है। लेकिन सच ये है, कि जब भी वो अपना प्रभाव जमाने चलता है, तब उसे मुंह की खानी पड़ती है।

अब तो भारत से भौगोलिक क्षेत्र में काफी ज्यादा छोटे ताइवान और वियतनाम ने भी चीन को कहीं न कहीं छोड़ा है और अब तो भारत भी कूटनीतिक क्षेत्र में चीन पर हावी हो रहा है। लेकिन चीन इसमें कुछ नहीं कर पा रहा है।

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