History

जानिए आखिर क्यों डॉ भीम राव आंबेडकर ने अपने अंतिम समय में हिन्दू धर्म का त्याग किया ??

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भारतीय संविधान के रचियता माने जाने वाले डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर ने सन 1956, 14 अक्टूबर को हिन्दू धर्म त्याग कर बुद्ध धर्म अपना लिया था। उनके साथ साथ उनके 365000 लोगों ने भी नागपुर में बुद्ध धर्म को अपना लिया था। अंबेडकर लंबे समय से हिंदू धर्म के आलोचक थे और उनका मानना था कि हिन्दू धर्म भारतीय समाज के लिए अंग्रेजों से भी बड़ा खतरा है जाहिर है ऐसा उन्होंने दलितों के हो रहे शोषण के लिए ही कहा था। अपने पूरे जीवन में, अम्बेडकर धर्मनिरपेक्षता के कट्टर समर्थक थे। एक उदाहरण जो इस बात की पुष्टि करता है कि वह समान नागरिक संहिता (Uniform civil code) के समर्थक थे। संविधान सभा की बहस के दौरान, उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा,

 

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अंबेडकर के इस धर्म परिवर्तन से प्रेरित होकर, म्यांमार के 5,000 तमिलों ने चान हंटून जोकि बर्मा के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश थे के नेतृत्व में रंगून में 28 अक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था।

अम्बेडकर की मृत्यु के कुछ समय बाद ही बौद्ध आंदोलन उनके परिवर्तन के कारण रुक गया था। उन्हें तत्काल इतना जनसमर्थन नहीं मिला, जिसकी अंबेडकर को उम्मीद थी।

डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर ने 6 दिसंबर 1956 को Delhi में अंतिम सांस ली थी लेकिन उनका अंतिम संस्कार मुंबई में दादर चौपाटी में किया गया था। यह भारतीय इतिहास में सरदार पटेल के अंतिम संस्कार (1950) के बाद दूसरा ऐसा अंतिम संस्कार था, जहां सर्वाधिक लोग उमड़े।

अब यह जगह चैत्य भूमि के नाम से प्रसिद्ध है। 5 दिसंबर 1971 को डा. आंबेडकर की पुत्रवधु मीरा आंबेडकर ने चैत्य भूमि का उद्घाटन किया था तब से हर साल यहां लाखों लोग अपनी श्रद्धा प्रकट करने आते है।

 

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