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Cycle पर अपने पिता को बिहार ले जाने वाली ज्योति को मिल सकती है, इस बड़े Institute में ट्रेनिंग …

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जीवन-बदलने का अवसर क्या हो सकता है यह शायद उसी को पता होगा जिसके साथ ऐसा कुछ हुआ हो। Cycling federation  15 वर्षीय ज्योति कुमारी को अगले महीने ट्रायल के लिए आमंत्रित करेगा। वह अपने बीमार पिता को लेकर गुरुग्राम से बिहार जाने के लिए रास्ते पर निकली थी जिससे प्रभावित होकर Cycling federation of India ने यह फैसला लिया है। Ivanka trump ने भी ज्योति की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया था।

देशव्यापी लॉकडाउन के कारण ज्योति अपने पिता के साथ गुरुग्राम में अटक गई थी तब  ज्योति ने अपने पिता को अपनी साइकिल ली पिछली सीट पर बिठाया  और सात दिनों में 1200 किमी को कवर करते हुए अपने मूल स्थान पर ले गई।

साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओंकार सिंह ने पीटीआई को बताया कि अगर कक्षा आठ की छात्रा ज्योति कुमारी ने ट्रायल पास कर लिया, तो उसे यहां के आईजीआई स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक नेशनल साइक्लिंग अकादमी में trainee  के रूप में चुना जाएगा।

भारतीय खेल प्राधिकरण की यह अकादमी, एशिया में सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक है और खेल की विश्व संस्था यूसीआई की मान्यता है।

सिंह ने कहा, “हमने आज सुबह लड़की से बात की और हमने उसे बताया कि उसे अगले महीने दिल्ली बुलाया जाएगा। उसकी यात्रा, ठहरने और अन्य चीज़ों का सारा खर्च हमारे द्वारा उठाया जाएगा।”

ज्योति का सफर सोशल मीडिया पर भी एक व्यापक चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ इस बारे में बात हुई है कि करियर के रूप में साइक्लिंग को आगे बढ़ाने के लिए उसमें क्या है।

उन्होंने कहा, “अगर उसे घर से किसी के साथ आने की जरूरत है, तो हम इसकी अनुमति भी देंगे। हम अपनी बिहार राज्य इकाई के साथ परामर्श करके देखेंगे कि उसे परीक्षण के लिए दिल्ली कैसे लाया जा सकता है,” उन्होंने कहा।

यह वाकया उस प्रचार की याद दिलाता है जब कंबाला के रेसर श्रीनिवास गौड़ा ने एक स्थानीय दौड़ में एक सनसनीखेज दौड़ के साथ कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, जिससे  सोशल मीडिया में उनकी उसेन बोल्ट के साथ तुलना की जाने लगी और खेल मंत्री किरेन रिजुवु ने भी उन्हें  परीक्षण के लिए आमंत्रित किया।

नौजवान को ट्रायल देने के पीछे तर्क के बारे में पूछे जाने पर, सिंह ने कहा, “उसे अपने पास कुछ होना चाहिए। मुझे लगता है कि 1200 किमी से अधिक साइकिल चलाना कोई मामूली काम नहीं है। उसके पास ताकत और शारीरिक सहनशक्ति होनी चाहिए और हम इसे परखना चाहते हैं। ”

“हम उसे एकेडमी में रखे गए कम्प्यूटरीकृत साइकिल  पर बैठा देंगे और देखेंगे कि क्या वह  चुने जाने के लिए योग्य है या नहीं । उसके बाद वह अकादमी  में as a trainee शामिल हो सकती है और उसे कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।”

उन्होंने कहा कि CFI  हमेशा टैलेंट का पता लगाने की कोशिश करता है।”हमारे पास अकादमी में 14-15 वर्ष की आयु के लगभग 10 साइकिल चालक हैं।”

आपकी जानकारी के लिए बता दे की Cycling federation of India ही भारत की साइकिल टीम को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करती है।

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