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ISRO को बड़ी कामयाबी, कई बड़े बड़े देशों को छोड़ा पीछे …

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ISRO Made Lunar Soil: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पृथ्वी पर कृत्रिम चंद्रमा की मिट्टी के निर्माण की अपनी असाधारण प्रक्रिया के लिए पेटेंट प्राप्त किया है। चंद्र मिट्टी या चंद्रमा की मिट्टी को ‘रेजोलिथ’ कहा जाता है और इसे पृथ्वी पर बनाने से न केवल चाँद पर चलने वाले रोवर्स की गति का अध्ययन करने में आसानी होगी बल्कि इससे रोवर्स भेजने से पहले चंद्रमा की सतह का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इसरो के आवेदन से पता चला है कि इस प्रक्रिया से चंद्रमा की मिट्टी को प्रभावी ढंग से पृथ्वी पर बना सकते है और वह भी बहुत कम लागत में।

ISRO Made Lunar Soil-

पेटेंट प्राप्त करना पृथ्वी पर Regolith (चंद्रमा की मिट्टी) के उत्पादन के साथ शुरू करने के लिए आवश्यक कुछ आवश्यक चीजों में से एक था। चंद्र मिट्टी को बनाने  की प्रक्रिया के साथ शुरू करने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है। इसरो ने पेटेंट आवेदन के रूप में सभी आवश्यक कारकों जैसे mineralogy, grain size distribution, bulk chemistry and geo-mechanical properties को भी पाया है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस पेटेंट प्रक्रिया ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को हाइलैंड लूनर मिट्टी को बनाने में सक्षम बनाया है। चंद्रमा की सतह पर रोवर्स भेजने से पहले परीक्षण किए गए मिट्टी परीक्षण से  इसरो को  सहायता मिलेगी। रिपोर्टों से पता चला कि चंद्रमा की सतह में 80 प्रतिशत ‘हाइलैंड्स’ शामिल हैं जो कि craters, cavities and mountains के साथ चंद्रमा की सतह पर उपस्थित हैं।

ISRO Made Lunar Soil-

कई देशों के कई अन्य अंतरिक्ष संगठन चंद्रमा की मिट्टी और पृथ्वी पर उसको बनाने में असफल रहे हैं। इसरो की चंद्र मिट्टी और अन्य एजेंसी के सिमुलेंट के बीच का अंतर यह है कि इसरो ने हाइलैंड्स को दोहराने का एक तरीका ढूंढ लिया है। जहां दूसरे देशों ने चंद्रमा की मिट्टी बनाई है जो आम तौर पर चंद्रमा के समतल क्षेत्रों में पाई जाती है।

इसरो प्रमुख के सिवन ने अपने बयान में खुलासा किया कि अंतरिक्ष एजेंसी की इस नई कामयाबी से  के माध्यम से चन्द्रयान -3 रोवर की सफल सॉफ्ट लैंडिंग सुनिश्चित होगी। रिपोर्टों के अनुसार, इसरो के चंद्रयान -3 मिशन के 2020 तक या 2021 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। चंद्रयान -3 में एक लैंडर और रोवर होने वाला है  इसके विपरीत जहां चंद्रयान -2 में एक लैंडर और रोवर के साथ एक ऑर्बिटर भी था। इसरो प्रमुख ने बताया कि चंद्रयान -2 ऑर्बिटर अच्छे स्वास्थ्य में रहता है और इसे आने वाले वर्षों तक संचालित करना चाहिए और इसलिए चंद्रमा पर भारत के तीसरे मिशन में ऑर्बिटर भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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