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कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब भारत को करनी पड़ेगी इसकी भी जाँच

MoHFW has issued an advisory to the state governments asking them to ensure safe drinking water supply: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने राज्य सरकारों को एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें उन्हें देश भर में 3 मई तक बढ़ाए जाने वाले लॉकडाउन के दौरान सुरक्षित पेयजल आपूर्ति और प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। राज्यों से भी कहा गया है कि वे जल संसाधनों की समय समय पर जांच करने के लिए गांवों में फील्ड टेस्ट किट भेजें और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चौबीस घंटे सुनिश्चित करें।

जानिये भारत सरकार को लेना पड़ा ये फैसला!

साबुन के साथ हाथों की बार-बार धुलाई को वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रभावी तरीका बताया गया है तथा देश की जनता को बार बार हाथ धोने के लिए प्रेरित किया है जिससे पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है!

भारत में कई राज्यों के लिए जल आपूर्ति सुनिश्चित करना एक चुनौती क्यों होगी?

स्वच्छ जल तक पहुंच का अभाव स्वयं एक चुनौती है जिसका देश कई वर्षों से सामना कर रहा है। 2001 में औसतन प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 1820 क्यूबिक मीटर से घटकर 2011 में 1545 क्यूबिक मीटर हो गई, और वर्ष 2025 और 2050 में क्रमशः 1341 और 1140 तक कम हो सकती है।वर्षा की कमी और भिन्नता के कारण, देश के कई क्षेत्रों की पानी की उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है और इसे पानी की कमी के रूप में माना जा सकता है। 2018 की रिपोर्ट में, पानी और स्वच्छता वकालत करने वाले समूह वाटरएड ने भारत को 10 देशों में शीर्ष स्थान दिया है, जहां घर के करीब साफ पानी की सबसे कम पहुंच है, 16.3 करोड़ लोगों ऐसे है जिनके पास साफ़ की उपलब्धता है!

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